विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है? कौन-से फ़ॉर्म मतदाता सूची में नाम जोड़ते या हटाते हैं? SIR के दौरान क्या बदला? और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) को कहाँ रोका?
SIR क्या है?
भारत में मतदाता सूची को तीन तरीक़ों से अपडेट किया जाता है। यह व्यवस्था जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 में है। SIR तीसरा तरीक़ा है। इसमें पूरी सूची नए सिरे से बनाई जाती है।
संक्षिप्त पुनरीक्षणहर साल
मौजूदा सूची मसौदे के रूप में छपती है। लोग दावे और आपत्तियाँ दाख़िल करते हैं। फिर सूची सुधारी जाती है। किसी को दोबारा पात्रता साबित नहीं करनी पड़ती।
गहन पुनरीक्षणकभी-कभी · पिछली बार 2002–04 में
अधिकारी घर-घर जाते हैं। सूची शुरू से बनाई जाती है। बिहार में पिछली बार यह 2003 में हुआ था।
विशेष पुनरीक्षणकभी भी, लिखित कारणों के साथ
धारा 21(3) के तहत चुनाव आयोग कभी भी किसी भी तरह का पुनरीक्षण करा सकता है। "विशेष गहन पुनरीक्षण" इसी का इस्तेमाल करता है। इससे सामान्य चक्र से बाहर पूरी सूची नए सिरे से बनती है।
चरण
आदेश की तारीख़
दायरा
सूची: पहले → बाद में
बिहार पायलट
24 जून 2025
बिहार
7.89 → 7.42 करोड़ (अंतिम)
चरण 2
27 अक्टूबर 2025
12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें यूपी, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल शामिल हैं
50.99 → 45.81 करोड़ (अंतिम)
चरण 3
14 मई 2026
19 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश, जिनमें महाराष्ट्र, दिल्ली, कर्नाटक, तेलंगाना शामिल हैं
ये सभी फ़ॉर्म निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 में तय हैं। किसी फ़ॉर्म को बदलने के लिए क़ानून मंत्रालय को नियमों में संशोधन करना होता है।
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फ़ॉर्म 6नाम जोड़ें
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का आवेदन। इस पर "नया मतदाता" लिखा है, पर इसे कोई भी भर सकता है जिसका नाम सूची में नहीं है। जैसे 18 साल के पहली बार के मतदाता, दूसरे निर्वाचन क्षेत्र से आए लोग, और जिनके नाम हटा दिए गए।
आपको दिखाना होता है कि आप 18 साल या उससे ज़्यादा के हैं, भारतीय नागरिक हैं, और आम तौर पर उसी पते पर रहते हैं।
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फ़ॉर्म 7नाम पर आपत्ति / नाम हटाना
किसी के नाम पर आपत्ति, या नाम हटाने का अनुरोध। कारण हो सकते हैं: व्यक्ति की मौत, कहीं और चले जाना, नाम दो बार होना, कम उम्र होना या नागरिक न होना। 2022 से उस निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता यह फ़ॉर्म भर सकता है।
हर आपत्ति की BLO मौक़े पर जाँच करता है। एक व्यक्ति पाँच से ज़्यादा आपत्तियाँ दे, तो ERO जाँच करता है। मतदाता को नोटिस और सुनवाई मिलती है। झूठा घोषणापत्र देना 1950 के अधिनियम की धारा 32 के तहत दंडनीय है।
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फ़ॉर्म 8सुधार या पता बदलना
पता बदलना, ब्योरे सुधारना, नया वोटर आईडी लेना, या दिव्यांग व्यक्ति के रूप में दर्ज होना। SIR के दौरान अतिरिक्त घोषणापत्र फ़ॉर्म 8 के साथ भी जोड़ा गया।
SIR घोषणापत्र"अनुलग्नक D"
जून 2025 से SIR के लिए फ़ॉर्म 6 और 8 में जोड़ा गया। इसमें नागरिकता का घोषणापत्र था, और जन्म तिथि के हिसाब से दस्तावेज़ माँगे जाते थे। बाद में एक सवाल जुड़ा: क्या आप या आपके माता-पिता 2002–04 की सूची में थे? 29 सितंबर 2026 को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए इसे हटा दिया गया।
BLO पहले से भरा गणना फ़ॉर्म देता है। आप लगभग एक महीने में उस पर दस्तख़त करके लौटाते हैं।
2मसौदा सूची
सिर्फ़ लौटाए गए फ़ॉर्म शामिल होते हैं। बाक़ी को मृत, स्थानांतरित, दोहरा या लापता दर्ज किया जाता है।
3मैपिंग
आपके फ़ॉर्म का मिलान 2002–04 की सूची से होता है। ख़ुद या माता-पिता के ज़रिए मिलान हो जाए, तो बहुत कम या कोई दस्तावेज़ नहीं लगता।
4नोटिस
मिलान न हो, या सॉफ़्टवेयर "तार्किक विसंगति (logical discrepancy)" बताए, तो आपको पात्रता का दस्तावेज़ देना होगा।
5सुनवाई
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) तय करता है कि आपका नाम रहेगा या हटेगा।
6अंतिम सूची और उसके बाद
ज़िला निर्वाचन अधिकारी (DEO) के पास अपील करें, फिर राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास (बंगाल में ट्रिब्यूनल बने)। या बाद में फ़ॉर्म 6 से दोबारा आवेदन करें।
SIR में ज़्यादातर नाम चरण 2 पर ही हटे। वजह थी फ़ॉर्म न लौटाना या घर पर न मिलना। किसी की अलग से अपात्रता तय होने के बाद नहीं। किसी चुनाव का नामांकन बंद होते ही सूची फ़्रीज़ हो जाती है। तब जिसका नाम सूची में नहीं है, वह उस चुनाव में वोट नहीं दे सकता।
SIR के दौरान क्या बदला, और किसने आपत्ति की
फ़ॉर्म 6 और 8 के साथ घोषणापत्र जोड़ा गया
यह आदेश बिहार SIR के साथ आया। चुनाव आयोग का कहना है कि इसे सर्वसम्मति से मंज़ूरी मिली थी। कौन-से दस्तावेज़ लगेंगे, यह जन्म तिथि पर निर्भर है। यह नागरिकता अधिनियम की तय तारीख़ों के हिसाब से है।
रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों का नियंत्रण घटा; ECINet शुरू
क़ानून के मुताबिक़ ERO ही सूची के ज़िम्मेदार हैं। पर उनसे ERONet पर नाम जोड़ने और बहाल करने के अधिकार ले लिए गए। बदलाव अब केंद्रीय ECINet प्लेटफ़ॉर्म पर होते हैं।
चरण 2 के दौरान कई राज्यों में लोगों ने बताया कि उनके नाम से, उनकी जानकारी के बिना, फ़ॉर्म 7 के ज़रिए नाम हटाने के अनुरोध दाख़िल हुए। भोपाल में जाँच का आदेश हुआ। सोमनाथ में 269 लोगों ने लगभग 15,000 मतदाताओं के नाम हटाने के फ़ॉर्म दाख़िल किए। इनमें ज़्यादातर मुसलमान थे।
खुलासे के बाद, जिन 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहाँ हटाए गए मतदाता सादे क़ानूनी फ़ॉर्म 6 से दोबारा आवेदन कर सकते हैं। अधिकारियों को SIR से पहले और बाद की सूचियों की तुलना करनी होगी, ताकि ग़लत तरीक़े से हटाए गए नाम मिल सकें।
पहचान के लिए आधार को 12वें दस्तावेज़ के रूप में मानने का आदेश दिया। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि पहले के आदेशों के बावजूद अधिकारी इसे नहीं ले रहे। आधार अब भी नागरिकता का सबूत नहीं है।
"हमने किसी भी संशोधित फ़ॉर्म 6 को मंज़ूरी नहीं दी है"
चुनाव आयोग के इस दावे को ख़ारिज किया कि कोर्ट ने फ़ॉर्म 6 के घोषणापत्र को बरक़रार रखा था। कोर्ट रिकॉर्ड देखेगा कि फ़ॉर्म किसने बदला। कोर्ट ने कहा कि ग़ैरक़ानूनी पाया गया कोई भी फ़ैसला वह रद्द कर सकता है।
चुनाव आयोग लिखित कारणों के साथ विशेष पुनरीक्षण करा सकता है। कोर्ट ने ये दलीलें ख़ारिज कीं कि प्रक्रिया ने 1950 के अधिनियम और नियमों को तोड़ा, या सूची में पहले से दर्ज लोगों की नागरिकता की धारणा को कमज़ोर किया।
मई 2026 के फ़ैसले ने बिहार के ढाँचे को मंज़ूरी दी थी। फ़ॉर्म 6 में बाद के बदलाव उसके बाद आए। इसलिए कोर्ट ने कहा है कि वे उस फ़ैसले के दायरे में नहीं हैं। 5 अक्टूबर की कोर्ट की ज़्यादातर टिप्पणियाँ मौखिक थीं। फ़ॉर्म 6 पर लिखित आदेश का इंतज़ार है।
अगर आपका नाम सूची में नहीं है
1जाँचें
चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल (voters.eci.gov.in) या अपने राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर मौजूदा सूची में नाम खोजें।
2दोबारा आवेदन करें
आपके राज्य में SIR पूरा हो चुका है: फ़ॉर्म 6 भरें, ऑनलाइन या अपने BLO के ज़रिए। 29 सितंबर 2026 से SIR घोषणापत्र की ज़रूरत नहीं है।
3दावा करें
SIR अभी चल रहा है (जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र): दावे और आपत्तियाँ की अवधि में दावा दाख़िल करें।
4अपील करें
सुनवाई के बाद नाम हटा: ज़िला निर्वाचन अधिकारी के पास अपील करें।
5जल्दी करें
किसी भी चुनाव की घोषणा से पहले। नामांकन बंद होते ही सूची फ़्रीज़ हो जाती है।